काश


 


काश, उसने अपनी तन्हाई के किस्सों को एक बार ही सही सुनाया तो  होता,

काश,उस भीड़ से जहाँ उसने खुद को अकेला पाया वहां से निकल के एक  बार के लिए सही आया तो होता। 

काश, जिस तन्हाई से तंग आकर उसने मौत को गले लगा लिया, उसके गुनहगारों को उनकी गलती का एहसास दिलाया तो होता,

काश, उसका कोई अपना झूठा ही सही एक बार उसे अपने सीने से लगाया तो होता। 

जब कभी वो मौन हो जाता, उसको कोई जबरजस्ती अपने पास  बैठा के उसको समझाया तो होता,

काश, जब कभी वो रूठ जाता, उसके माथे को चूम कोई उसे मनाया तो होता। 

आज उसकी मौत पे झूठे आँसू बहाने वाले, काश उस वक़्त जब उसको किसी अपने की जरूरत थी उनमे से एक भी निकल के आया तो होता।

क्या इस दुनिया में अपनी जगह और पहचान बनाये रखने के लिए सबसे लड़ना पड़ता है,

और क्या सच में अपने बारे में कुछ अच्छा सुनने के लिए मरना पड़ता है। 


Comments

  1. Bhut pyara likha hai 💕💕💕💕

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  2. बहुत ही खूबसूरती से बातों को कहा है।👌👌👌👌

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